Skip to content

सैनिक की व्यथा

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

सन्दीप कुमार 'भारतीय'

कविता

August 13, 2016

“सैनिक की व्यथा ”
**************

घिरा हुआ है वतन आज
देश में छुपे गद्दारों से
दुश्मनों का मुझे डर नहीं
ओढ़े बैठे खाल भेड़ की
डर है ऐसे छुपे यारों से
सत्ता में बैठे खादीधारी
हमको लड़वाकर आपसे में
हिन्दू मुस्लिम में बाँट रहे
हितैषी बनकर आते सामने
पर्दे के पीछे दूध मलाई चाट रहे
कैसे पार लगेगी देश की नैया
इन घुनी हुई पतवारों से
मुझको घायल कर रहे
जो खेले मेरी छाती पर
अब छलनी कर रहे मेरा आँचल
अपनी द्वेष की तलवारों से
बचा लूँगा वतन को मैं
दुश्मन की चालों से
कोई बताये मुझे कैसे बचूं मैं
खुद अपने ही वारों से
घिरा हुआ है वतन आज
देश में छुपे हुए गद्दारों से |

“सन्दीप कुमार”

Author
सन्दीप कुमार 'भारतीय'
3 साझा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं | दो हाइकू पुस्तक है "साझा नभ का कोना" तथा "साझा संग्रह - शत हाइकुकार - साल शताब्दी" तीसरी पुस्तक तांका सदोका आधारित है "कलरव" | समय समय पर पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होती... Read more
Recommended Posts
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है मगर छन भी आती कहीं रोशनी है न करती लबों से वो शिकवा शिकायत मगर बात नज़रों से... Read more
आहिस्ता आहिस्ता!
वो कड़कती धूप, वो घना कोहरा, वो घनघोर बारिश, और आयी बसंत बहार जिंदगी के सारे ऋतू तेरे अहसासात को समेटे तुझे पहलुओं में लपेटे... Read more
अभी पूरा आसमान बाकी है...
अभी पूरा आसमान बाकी है असफलताओ से डरो नही निराश मन को करो नही बस करते जाओ मेहनत क्योकि तेरी पहचान बाकी है हौसले की... Read more
मुक्तक
होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी... Read more