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सरहद–मुक्तक–डी के निवातियाँ

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

मुक्तक

October 18, 2016

भायी न भाई को भाई की सूरत, बंटवारा कर डाला
जन्मे थे एक कोख में, लालच ने दुश्मन बना डाला
हमने तो सरहदे बनायी थी अमन-ओ-चैन के लिये
ज़ालिमो ने उसको भी मैदान-ऐ-कब्रगाह बना डाला !!

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डी के निवातियाँ________!!!

Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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