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सरहद के हालात

Neelam Sharma

Neelam Sharma

कविता

June 5, 2017

सरहद के हालात

शूरवीर निर्भीक वीर और पराक्रमी योद्धा नौजवां सैनिक वो सुहाग,भाई और भारत मां के योग्य बेटे
खोद देते हैं शत्रु की कबर सरहद पर
टूटता है जब सबर का बांध सरहद पर।

है अति कपटी अधम दुर्जन दुश्चरित्र भ्रष्ट पाकिस्तां
बाज़ नहीं आता यह उपद्रव से अपने, सरहद पर।
बहुत ही दहशत में हैं हालात आज सरहद पर
नहीं काबू में रहते ज़जबात आज सरहद पर।

बहुत बिगड़े हुए हैं हालात आज सरहद पर
लगाकर बैठा है शत्रु घात आज सरहद पर।
बरसता है सुबह शाम कोहराम आज सरहद पर।
अब ही जाएंगे सब किस्से तमाम आज सरहद पर

रहती है रोज मां बहन पत्नी के दिल में उथल-पुथल
न जाने क्या होगा अंजाम आज सरहद पर।
रक्त ही रक्त और बस शव ही शव
नहीं हो पाती अपनों की पहचान सरहद पर।

दुश्मन देता है रोज़ नया आघात सरहद पर।
अब तो करने हैं बस में हालात सरहद पर।
कभी दुश्मन पर प्रहार तो शहादत कभी अपनों की
सैनिक देते हैं रोज़ ही इम्तिहान सरहद पर।

क्या आतंकवाद और क्या सत्ता की लालसा
अमानवियता और कलंक पूर्ण कार्य क्लाप
जय पराजय के युद्ध में बस करते हैं
खून ही खून और रक्तपात सरहद पर।

देखो दुश्मन ये अपना कितना कायर है।
रोज करता है छिप छिपकर वार सरहद पर।
ज़रूरी नहीं था युद्ध में सबका मारा जाना
मगर पाक आता नहीं है बाज़ सरहद पर।

सरहदी हक और धर्म के अस्तित्व पर संकट।
आज कर रहा है नरसंहार सरहद पर।
क्या इसका क्या उसका और क्या तेरा मेरा
लुट रहा है खुशियों का संसार सरहद पर।

निर्ममता क्रूरता और वेहशीपना बढ़ता ही
जा रहा है देख आज सरहद पर।
हो गये जो शहीद सरहद पर
रूह उनकी है दीप्ति मान सरहद पर।

खुले अंगारों के द्वार और फट रहा है
हररोज बारूदी ज्वार सरहद पर।
शत्रु होगा खड़ा नर्क के द्वार पर
भारतीय सैनिक जब करते प्रहार सरहद पर।

संभव नहीं है नीलम कविता में सबकुछ कहना
क्या घटा सैनिकों के साथ सरहद पर।
हैं शूरवीर सैना भारत की,विजय ध्वज फहरेगा
गूंजेगा राष्ट्र​गान बन विजयगान सरहद पर।

नीलम शर्मा

Author
Neelam Sharma
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