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समसामयिक

अमरेश गौतम

अमरेश गौतम

कविता

April 22, 2017

छोड़ दो कोशिशें किसी को जगाने की,
अब कहां फिक्र है किसी को ज़माने की।

Author
अमरेश गौतम
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता
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