.
Skip to content

शक्ति

sudha bhardwaj

sudha bhardwaj

कविता

January 28, 2017

शक्ति:

धुंधली-2 सी परछाई।
विहिव्ल मन पर छाई।
दया दृष्टि पाने को तेरी।
यों आँख मेरी भरआई।
शक्ति का स्वरूप है तू !
हर ओर तिमिर माँ धूप है तू !
आँचल तेरा नील गगन सा।
निशा विभावरी बन आई।
तेरी दया की कोर चाहिये।
यहाँ-वहाँ हर छोर चाहिये।
उजली-निखरी भोर चाहिये।
नव-निर्मित चहु ओर चाहिये।

सुधा भारद्वाज
विकासनगर उत्तराखण्ड

Author
sudha bhardwaj
Recommended Posts
***नारी है ***कमजोर नहीं तू ***
***अबला जीवन तेरी यही कहानी*** *******आँचल में है दूध****** ***********और*********** *******आंखों में है पानी****** (((इस कथन को हमें झुठलाना है))) *****नारी तू कमजोर नहीं है*****... Read more
ना  इत्तेफ़ाक़  कोई  ना   कोई  क़हर  चाहिये
ना इत्तेफ़ाक़ कोई ना कोई क़हर चाहिये नींद टूटे वो रु-ब-रु हों ऐसी सहर चाहिये कायनात को समझ पाउँ गीतांजली पढ़ के इक बार टेगौर... Read more
शक्ति
तू है शत्रुओं का नाश करे दुर्गा माँ तू दुख सबके हरदम हर ले दुर्गा माँ शक्ति मुझे दे जब आऊँ द्वारे तेरी नवरात्रे में... Read more
प्रमाण चाहिये
मुक्तक उसको हर बात का जवाब चाहिये ! मेरे दिन और रात का हिसाब चाहिये! चलना तो चाहूं हर कदम उसके साथ! पर मेरे विश्वास... Read more