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लिख देना

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

August 18, 2017

नफरतों के बाजारों में तुम प्यार लिख देना
बिखरती जुल्फ को मेरा सलाम लिख देना

अगर लिखना है तुमको तो मेरी तुम बात सुन लेना
जमाने मे मोहबत को इबादत सी लिख देना

जमाने को नजर भरके तुम्हे बस देखना ही है
अदावत से भी भारी है ये प्यार लिख देना

हिमालय की बुलंदी पर जो मेरा भाई बैठा है
हवाओ जाके तुम सरहद पे सलाम कह देना

जिन्होंने देश की खातिर अपनी जान दे दी है
सहादत पे मेरा प्यारे जय हिंद लिख देना

कि जिन माओ ने बेटो को कुर्बान कीना है
उन्हें तुम देश की रक्षा में महान लिख देना

कभी लिखना हो तुमको तो देश पे लिखना
शहीदों की चिताओ का यशगान लिख देना

ऋषभ जीना हो मरना हो या कुछ और करना हो
वतन के नाम तुम अपनी जान लिख देना

जय हिंद

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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