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रिमझिम बारिश….

CM Sharma

CM Sharma

गज़ल/गीतिका

September 11, 2017

दुनिया के पहरे से डरती रहती है…
दिल आँगन में सबसे छिप के मिलती है….

दिल में तेरे जो है वो बतला दे ना….
शाम सवेरे यूं ही रूठी रहती है….

मिलने को तो दिल दोनों के मिलते हैं
फिर भी किस्मत अपनी ही न मिलती है…

सपने तेरे मेरे थे, सो टूट गए….
ग़ुरबत में उल्फत कब किस को मिलती है…

रिमझिम बारिश निकली मेरी आखों से…
आँख ‘चँदर’ क्यूँ तेरी सूजी लगती है….

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/सी.एम्. शर्मा

Author
CM Sharma
उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की पर औरों की भी सुनता हूँ.....
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