.
Skip to content

रहे हम बन्द तालों में,चले गम फिर भी आते हैं

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

मुक्तक

July 16, 2016

रहे हम बन्द तालों में,चले गम फिर भी आते हैं
किरण उम्मीद की लेकिन , वो अपने साथ लाते हैं
ये जीवन एक सिक्के सा, ख़ुशी गम जिसके दो पहलू
नहीं वो डगमगाते हैं ये सच जो जान जाते हैं

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
Recommended Posts
चलो चले हम, गाँव चले हम! आओ चले हम, गाँव चले हम! ये झुटी नगरी, छोड़ चले हम! ये झुटे सपने, तोड़ चले हम! चलो... Read more
यादों  के झोकें
यादों के तेरे जब झोकें चले आते हैं सांसों मे तेरी महकों के गुलाब चले आते हैं । ख्वाबों मे गुजरे हुए हसीन वो पल... Read more
〽आते है जिंदगी में〽
*〽आते है जिंदगी में〽* कुछ बदलकर आते है जिंदगी में,, कुछ सम्भलकर आते है जिंदगी में.. हर कोई शख्स कहा समझ पाता है,, कुछ निकलकर... Read more
नही आते
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते, हमारे बाग़ों के फूलो से महक नहीं आते, मुहब्बत किया वफ़ा पाने की उम्मीद में, बेवफ़ा की... Read more