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रहते हो दिल के करीब ..रहते हो दिल के पास

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

September 30, 2016

रहते हो दिल के करीब
रहते हो दिल के पास
अजनबी सा लगने लगा हर शय
जब से तुम हो रूह के रेशे के पास
जानते हो …
इन हवाओ मे इन फिजाओंमे
इन दरख्तों मे इन घटाओ मे
इतनी खूबसूरती क्यूं है क्यूंकि……. ………….
तुम हो एक प्यारी सी आस
रहते हो दिल के करीब रहते हो दिल के पास

ये कल कल करती नदियॉ
ये उठती गिरती लहरे
ये चॉद ये सितारे ये सारे नजारे
बरबस ही अपनी ओर खीचते क्यूं है
क्यूंकि… देते हो मधुर एहसास
रहते हो दिल के करीब रहते हो दिल के पास हो

मगरूर घटाए भी टूटकर बिखर जाती है
बारिश की बूंद बनकर धरा को भिगो जाती है
जानते हो क्यूं …
कण कण मे है प्रेम का वास तुम हो मीठी प्यास
रहते हो दिल मे रहते हो दिल के पास ……
नीरा रानी

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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