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यादें

Versha Varshney

Versha Varshney

कविता

March 4, 2017

हंसती हुई आँखों ने देखे थे कभीं सपने प्यार के ।
महकी सी अदाओं ने सजाये थे कुछ लम्हे याद के ।
तरन्नुम में गाये थे कभी गीत प्यार के।
बिखर गयी जाने क्यों सौगात प्यार की। बिखरे अरमानों ने सजाये थे गुलिस्तां अजाब के ।
कहकशां है या गर्दिश के वो नज़ारे।
आते है आज भी क्यों याद वो अपने सारे ।

Author
Versha Varshney
कवियित्री और लेखिका अलीगढ़ यू पी !_यही है_ जिंदगी" मेरा कविता संग्रह है ! विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखन ! साझा संकलन -१.भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ ! २.पुष्पगंधा pride of the women award 2017 Money is not important then... Read more
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