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मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती है

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गीत

July 3, 2017

मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती है
कभी हँसती है मुझ पर ये कभी मुझमें ही रोती है

सुबह से शाम तक साथी तुम्हारी राह ताकती है
मिलन की चाह में पगली में,सदा सजती सम्बरती है
मेरी आँखों मे सासों में,मेरे ख्याबो में तुम रहती
मेरी शामो सहर हर पल तुम्हारी यादों मे रोती
मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती है
कभी हँसती है मुझ पर ये कभी मुझमें ही रोती है

तेरे दीदार की खातिर ये आँखे भीनी रहती है
कभी नहरों कभी नदिया कभी सागर सी बहती है
जुदा ये दर्द कैसा है जो हर सीने में उठता है
मोहबत में तुम्हारी ये सुबह शामो सिसकता है
मेरी
मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती हैं
कभी हँसती है मुझ पर ये कभी मुझमें ही रोती है

मोहबत रोग ऐसा है जो हर दिल मे पनपता है
बताऊँ में तुम्हे कैसे की दिल कैसे सुलगता है
मेरा कम्बख़त ये दिल है जो तुम से ही जीता है
मेरी दुनिया तेरी यादों के साये में रहती है
कभी हँसती है मुझ पर ये कभी मुझमें ही रोती है

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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