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मुक्तक

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

मुक्तक

July 1, 2017

चारों ओर नव तृणों की बहार आ गई
पर्यवरण में हर जगह मुस्कान छा गई
धरती पर फसलों की सौगात आ गई
हर तरफ हरियाली की बहार आया गई
शायद ए बैरंग बूंद तेरा ही जादू है
जिससे यहाँ रंगों की बरसात आ गई

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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