.
Skip to content

“मजदूर”

RAJESH BANCHHOR

RAJESH BANCHHOR

कविता

May 2, 2017

अपनी सांसों में उर्जा भरकर
निर्माण जो करता नवयुग का
औरों को सुख-सुविधा देकर
करे सामना हर दुख का
जो रूके अगर, रूक जाए दुनिया
सारे जग का रीढ़ वही
जोश, लगन, संकल्प है जिनमें
फुरसत में आराम नहीं
हिम्मत जिनकी शान है यारों
मेहनत जिनकी है पूजा
कर्तव्य निभाना लक्ष्य है जिनका
मजदूर है वो, कोई और न दूजा
**********************

Author
RAJESH BANCHHOR
"कुछ नया और बेहतर लिखने की चाह......" राजेश बन्छोर "राज" जन्मतिथि - 05 जून 1972 शिक्षा - सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा सम्पर्क - वार्ड-2, पुरानी बस्ती हथखोज (भिलाई),पोस्ट - सुरडूंग, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ 490024 मो. नं. - 7389577615 प्रकाशन... Read more
Recommended Posts
अभी पूरा आसमान बाकी है...
अभी पूरा आसमान बाकी है असफलताओ से डरो नही निराश मन को करो नही बस करते जाओ मेहनत क्योकि तेरी पहचान बाकी है हौसले की... Read more
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है
ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है मगर छन भी आती कहीं रोशनी है न करती लबों से वो शिकवा शिकायत मगर बात नज़रों से... Read more
निकलता है
सुन, हृदय हुआ जाता है मृत्यु शैय्या, नित स्वप्न का दम निकलता है। रोज़ ही मरते जाते हैं मेरे एहसास, अश्क बनकर के ग़म निकलता... Read more
अंदाज़ शायराना !
जैसा सम्मान हम खुद को देते है ! ठीक वैसा ही बाहर प्रतीत होता है ! जस् हमें खुद से प्रेम है ! तस् बाहर... Read more