.
Skip to content

बेटियां

सौम्या मिश्रा अनुश्री

सौम्या मिश्रा अनुश्री

कविता

January 22, 2017

नील छंद

विधान ~ भगण×5 + गुरु

शील विनीत समाहित सुन्दर सोहक है।
रूपवती बिटिया अतिपावन मोहक है।।
शारद सीय इला हर रूप मनोहर है।
है जगती बिटिया अनमोल धरोहर है।।

रूपहि सौम्य सुता अति निर्मल पावन है।
शोभित ही करती बिटिया घर आँगन है।।
भाग्य जगें बिटिया जब जन्म धरा पर हो।
निर्भय श्रेष्ठ बने बिटिया मति तत्पर हो।।

सौम्य मिश्रा अनुश्री

Author
सौम्या मिश्रा अनुश्री
धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी बढ़ें, करने को शब्द गुंजन। कुछ हाँथ तुम भी बढ़ाओ, कुछ हाँथ हमारे भी बढ़ें, करने साहित्य में हवन। सुगमित अमिय हुआ... Read more
Recommended Posts
__जिग़र का टुकड़ा होती है बिटिया___
बिदाई के दिन जिगर का टुकड़ा होती है बिटिया... मगर जन्म होने पर क्यों शोक होती है बिटिया... . निर्मल संस्कारों की छाँव में पलती... Read more
बिटिया
घर आँगन की शान है बिटिया,माँ की जैसे जान है बिटिया बिटिया घर की रौनक होती, चेहरे की मुस्कान है बिटिया ख़ुशी ख़ुशी हर गम... Read more
बेटी
खुशियों का कारण है मेरी बिटिया दुख का निवारण है बिटिया घर की किलकारी बिटिया हम सबकी प्यारी है बिटिया । मा की दुलारी बिटिया... Read more
बिटिया
मेरी एक कहानी बिटिया। मेरे दिल की रानी बिटिया।। उसकी चंचल बातें हर-इक। याद मुझे जुबानी बिटिया।। हर पल उसके साथ जिऊँ मैं। वही मेरी... Read more