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बेटियाँ

ashok babu mahour

ashok babu mahour

कविता

January 15, 2017

बेटियाँ घर की
रौनक
रोशनी समाज की
लाडली माँ की
आँगन की किलकारी
फुलवारी I
बेटियाँ होती प्यारी
निभाती फर्ज
महानता का
करती संघर्ष
जीवन भर
रचती इतिहास नित नया
करती रोशन
नाम माँ बाप का I
बेटियाँ सन्देश
समाज की
इनके बिना
न महकते फूल
आँगन के
न होता उदय रवि
मयंक भी
इन्हीं से बँधी है
डोर
विश्व,धरा पटल की I

अशोक बाबू माहौर

Author
ashok babu mahour
अशोक बाबू माहौर प्रकाशित साहित्य-विभिन्न पत्रिकाओं जैसे -स्वर्गविभा ,अनहदकृति ,सहित्यकुंज ,हिंदीकुंज ,साहित्य शिल्पी ,पुरवाई ,रचनाकार ,पूर्वाभास,वेबदुनिया आदि पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित I साहित्य सम्मान -इ पत्रिका अनहदकृति की ओर से विशेष मान्यता सम्मान २०१४-१५ से अलंकृति I संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा,... Read more
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हमारी बेटियाँ
माँ का आईना होती है बेटियाँ संस्कृति संस्कारों को संजोती हैं बेटियाँ कोमल भावनामय होती हैं बेटियाँ रीति रिवाजों को सहेजतीं हैं बेटियाँ कहीं बोयीं... Read more
बेटियाँ
​बड़े-बड़े काम की हैं बेटियाँ, ईश्वर के नाम की हैं बेटियाँ, घर की लक्ष्मी, घर की इज्जत हैं बेटियाँ, घर को घर बनाने वाली जन्नत... Read more
बेटियाँ
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