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बचा कुछ नही

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

July 1, 2017

उन्होंने जब ठुकराया तो हुआ कुछ नही
सासे रही मगर ज़िन्दगी में बचा कुछ नही

जब आप मिले थे तो गिले शिकवे नही
लेकिन आज इनके अलावा बचा कुछ नही

एक ही दौलत है जो तुमसे अता की है
उस प्यार बिन जीवन मे बचा कुछ नही

इस तरह उसको पलको पे सजाया हमनें
कि आँखो में बिन उसके बचा कुछ नही

वो अजनबी बड़ी दूर चला गया मुझसे
उसके बिना दिल कहाँ है पता कुछ नही

उसकी गोदी में सिर रखकर सो जाना
इससे बड़ी दर्द ए दिल की दवा कुछ नही

वो सुर्ख गुलाब भी पतझड़ में बचा नही
ऋषभ उस डाल पर बचा कुछ नही

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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