.
Skip to content

फागुन

Punam Garg

Punam Garg

हाइकु

February 28, 2017

छायी बहार
हवा ने रंग घोली
आया फागुन

मन भावन
धरा ओढ़ी चुनर
भाया फागुन

रंग गुलाल
हरओर मस्तियाँ
वर्षा फागुन

धूल कीचड़
मुखौटों पर लगी
हँसा फागुन

भांग -धतुरे
पी पीकर नाचता
नशा फागुन

चूनर भींगी
सकुचाई भऊजी
खिला फागुन

मिली राधिका
यमुना तट पर
झूमा फागुन

पूनम गर्ग

Author
Punam Garg
Recommended Posts
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 मदयुक्त भ्रमर के गुंजन सी, करती हो भ्रमण मेरे उर पर। स्नेह भरी लतिका लगती , पड़ जाती दृष्टि जभी तुम पर।। अवयव की... Read more
इंसानियत से इंसान पैदा होते है !
एक बूंद हूँ ! बरसात की ! मोती बनना मेरी फिदरत ! गर मिल जाए, किसी सीपी का मुख खुला ! मनका भी हूँ... धागा... Read more
अंदाज़ शायराना !
जैसा सम्मान हम खुद को देते है ! ठीक वैसा ही बाहर प्रतीत होता है ! जस् हमें खुद से प्रेम है ! तस् बाहर... Read more
आस!
चाँद को चांदनी की आस धरा को नभ की आस दिन को रात की आस अंधेरे को उजाले की आस पंछी को चलने की आस... Read more