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प्रेम में मीरा बनी मैं

Ananya Shree

Ananya Shree

गज़ल/गीतिका

January 30, 2017

1=गीतिका छंद

प्रेम में मीरा बनी मैं, प्रेम में ही राधिका!
प्रणय करती हूँ कभी मैं, अरु कभी हूँ साधिका!
होंठ से जब जब लगूँ मैं, बाँसुरी की धुन बनूँ!
अंग से लिपटी रहूँ अरु, प्रीत के मुक्तक चुनूँ!

अनन्या “श्री”

Author
Ananya Shree
प्रधान सम्पादिका "नारी तू कल्याणी हिंदी राष्ट्रीय मासिक पत्रिका"
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