.
Skip to content

बचपन और पेड़

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

March 17, 2017

???????
पेड़ सा ना कोई हितकारी,
खाते थे फल करते सवारी।
?
माँ की गोद सा हर एक डाली,
सुखमय ममता सी हरियाली।
?
दे दो छुटपन की वो मारामारी,
ना भाती थी बंगला ना गाड़ी।
?
पेड़-सा निस्वार्थ मन की क्यारी,
खिले थे हर चेहरे प्यारी-प्यारी।
?
शुद्ध हवा और अमृत बरसाती,
पेड़-सा दूजा ना कोई उपकारी।
?
इन पर रहते पक्षी ढेर सारी,
इनसे सजते जीवन हमारी।
?
मत काट इसको मार कुल्हाड़ी,
पेड़ हैं हर खुशियों की प्रहरी।
?
लौटा दो वो बचपन हमारी,
एक पेड़ लगाओ हर दुआरी।
????-लक्ष्मी सिंह ?☺

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
*पेड़*
जीवन का श्रँगार पेड़ हैं संकट की पतवार पेड़ हैं बिन इनके है सब कुछ सूना हर सुख का आधार पेड़ हैं *धर्मेन्द्र अरोड़ा*
पेड़
मेरा पेड़ तपती दुपहरी में जलाता है सूर्य जब हर इमारत, हर सड़क तब भी खड़ा रहता अटल मेरा पेड़ अचल एक ठांव हर राहगीर,... Read more
रमेशराज की पेड़ विषयक मुक्तछंद कविताएँ
-मुक्तछंद- ।। नदी है कितनी महान।। नदी सींचती है / खेत जलती हुई रेत नदी बूंद-बूंद रिसती है पेड़ पौधों की जड़ों में नदी गुजरती... Read more
अब तो हर अपना,बेगाना सा लगता है। तेरा शहर भी गमों का,ठिकाना सा लगता है।। तू थी शहर में तो, एक जमाना सा था। तू... Read more