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पानी

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

कविता

September 30, 2016

कभी किसी की आँखों से बरसा है,
कभी आसमान से पानी।

ज़रा संभाल कर रखना,
मिट न जाए इस जहां से पानी।

मोती इसकी आगोश में पलते है,
इसके दम पर ही हमारे प्राण चलते हैं।

अब बरसे तो पलकों पर थाम कर रखना,
कभी खो न जाए हमारी आँख से पानी।

बादलों की आँखें सूख गई अगर,
फिर न बरसेगा आसमान से पानी।
**** ****

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
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