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नोटबंदी-एक सिलसिला

अमरेश गौतम

अमरेश गौतम

मुक्तक

December 13, 2016

गड्डी महलों की निकली या न निकली,
अपने बटुए से नोट पुराने चले गए।
सुबह शाम हम खड़े कतारों में हर दिन,
बैंकों से महलों में पैसे चले गए।

Author
अमरेश गौतम
कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता
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