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नारी

arti lohani

arti lohani

हाइकु

October 2, 2017

नारी का तन ।
नहीं कोई वस्तु ।
पवित्र मन ।।

माँ का प्यार ।
कम न होगा कभी ।
है बेशुमार ।।

एक भारत ।
फिर जुदा क्यों है ।
ये पुरुषार्थ ।।

समझो अर्थ ।
क्यों कैद हो तुम ।
बनो समर्थ ।।

करो ये प्रण ।
नहीं हो कभी अब ।
नारी हनन ।।

आरती लोहनी

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arti lohani
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