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नारी तुम अधिकार नहीं तुम तो जीवन का आकार हो…

अरविन्द दाँगी

अरविन्द दाँगी "विकल"

कविता

March 8, 2017

नारी तुम अधिकार नहीं तुम तो जीवन का आकार हो…
नारी तुम अबला नहीं तुम तो सबल अपार हो…
नारी तुम विवश और नहीं तुम तो जननी संसार हो…
नारी तुम अब क्रंदन नहीं तुम तो प्रकृति को उपहार हो…
नारी तुम कमतर नहीं अब तुम तो शक्ति परम प्रतिकार हो…
नारी तुम केवल नवरात्रि की नहीं तुम तो पुज्यनीय हर वार हो…
नारी तुम बच्चों की मशीन नहीं तुम तो जीवन की सृजनहार हो…
नारी तुम अब बंदिशों में नहीं तुम मुक्त गगन आकाश हो…
नारी तुम ममता की सागर तुम रणचंडी जीवन संचार हो…

आभार नारीशक्ति?
✍कुछ पंक्तियाँ मेरी कलम से : अरविन्द दाँगी “विकल”

Author
अरविन्द दाँगी
जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"
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