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** दर्द सा उठता है धुंआ **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

March 20, 2017

दिल में दर्द सा उठता है धुआं

आज तक गैर अपना ना हुआ

करते है हम मालिक से दुआ

कब सुधरेगा राज-राजनेता मुआ

रोज मरते है दे दे ईश्वर की दुआ

आज तक इनको कुछ ना हुआ।।

?मधुप बैरागी

बंदिशें बहुत है मगर अंगार अल्फाज रखते है

वक्त आने दो साथी तब तक सुलगा के रखते हैं।
?मधुप बैरागी

बदलना है जमाने को तो सोच को अपनी बदलो

जमाना खुद बदल जायेगा ज़रा सोच के तो देखो
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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