.
Skip to content

” तुमने फिर , डाला है डेरा ” !

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

January 7, 2017

बढ़ता हुआ कारवां ,
थम सा गया है !
रेत के टीलों से बाहर ,
मन यहाँ है !
छूटा घर –
द्वार देहरी ,
अब पराया है सवेरा !

झिलमिलाते दीप दो ,
रोशन हुए हैं !
हमराही राह चलते ,
थक से गये हैं !
ओट घूँघट –
खोलते पट ,
मुदित सा मन लगे तेरा !

रूप यौवन लादकर ,
आगे बढ़ी हो !
बदले हुए से अर्थ ,
पहचाने खड़ी हो !
डेरे डेरे –
दे के फेरे ,
थका सा समय लुटेरा !

बृज व्यास

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
Recommended Posts
महक सा गया
महक सा गया * वक्त गुजरा सिखाकर सबक सा गया एक पत्ता हवा से सरक सा गया * ओस की बूँद सुन्दर लगी फूल पर... Read more
सच में लगा इंसान सा......
एकांत में चुपचाप सा शांत सा मगन में मगन इंसान सा, तल्लीन किसी लय में ऊँगली से बजती चुटकी को संगीत बना, कुछ गुनगुना रहा... Read more
विचलित सा मन
विचलित सा मन है मेरा कभी तरु छाया के अम्बर सा कभी पतझड़ के ठूंठ सा कभी प्रसन्न मैं,कभी दुखी क्रोधित सा मैं भींगा-भांगा सा,डरा... Read more
सखी और सम्बन्ध
न कोई है रिस्ता न कोई है नाता शायद इसे लिखने भूले बिधाता अगर धागे उससे जुड़े ही न होते तो हर रोज उसको क्यों... Read more