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डमरू घनाक्षरी

मधुसूदन गौतम

मधुसूदन गौतम

घनाक्षरी

April 21, 2017

***डमरू घनाक्षरी****
(*इसमें सभी वर्ण मात्रा रहित होते है*)
सकल जगत तव नमन करत रब।
भगवन न नजर कर इधर उधर।।
मन नगर नगर चल डगर डगर,
जब तक न पकड़ तव कर नटवर ।
तज कर सब मद कर चरण भजन,
कर करम सहज कर सफल उमर।
हरत अघनहर तव सब अघ पर।
जतन सकल कर मन चरनन धर।
******* मधु गौतम

Author
मधुसूदन गौतम
मै कविता गीत कहानी मुक्तक आदि लिखता हूँ। पर मुझे सेटल्ड नियमो से अलग हटकर जाने की आदत है। वर्तमान में राजस्थान सरकार के आधीन संचालित विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हूँ।
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