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चाँद मेरी छत पर आया

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

कविता

August 24, 2017

जब वो छत पर है आया
ये चाँद भी देख सरमाया
कभी छुपा कभी दिखा
तो कभी उसे रोना आया
जब वो छत पर आया
तो दिल को सुकून आया
उस चंद लब्जो में ही
फूलों को हे बरसाया
वो मेरा चाँद छत पर आया
न मैं कुछ बोला न उसने सुनाया
फिर जाने ये दिल किसने धड़काया
उसकी यादों का ये हिस्सा
मेरी ज़िंदगी मे आया
जब उसने छुआ मुझको
तो जाने क्यों नशा छाया आया
मदहोशी ने मुझे सताया
जब उसका हाथ मेरे हाथों में आया
स्वर्ग से भी ज्यादा सुकून आया
जब उसने मुझे गले से लगाया
मैंने कहाँ तू मुझे देख क्यूँ सरमाया
तुझे देखकर तो ये चाँद भी लजाया
कुदरत का दूसरा चाँद मेरी छत पर आया
जब रुख से उसने नकाब हटाया
मेरी सासो को उबाल आया
जब उसने मुझे दिल से लगाया

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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