.
Skip to content

चंद पैसो के लिये देश से तुम न करो मन दुषित…

अरविन्द दाँगी

अरविन्द दाँगी "विकल"

कविता

April 15, 2017

फ़ेक पत्थर घाटी की फ़िजा को तुम न करो प्रदुषित,
चंद पैसो के लिये देश से तुम न करो मन दुषित,
ये जो करवाते है तुमसे पैसो से पत्थरबाज़ी,
ज़रा गौर तुम भी करना ये बात मन में रखना,
क्यों न थामते बेटे इनके हाथों में कोई पत्थर,
क्यों ये भेजते उन्हें विदेश तुम्हे थमाकर पत्थर,
हा रोटी बमुश्किल मिलती यह जानते सभी,
पर मेहनत करो देशहित फ़िर कैसे हो कोई मुश्किल,
थोड़ा तुम भी तो ख़ुद को ज़रा पहचान लो,
कहा उनका करने से पहले अपना अंत:मन भी जानलो,
न थामो ईंट पत्थर माँ भारती को सम्मान दो,
कहता “अरविन्द” होकर “विकल” फिर…
फ़ेक पत्थर घाटी की फ़िजा को तुम न करो प्रदुषित,
चंद पैसो के लिये देश से तुम न करो मन दुषित…

✍कुछ पंक्तियाँ मेरी कलम से : अरविन्द दाँगी “विकल”

Author
अरविन्द दाँगी
जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"
Recommended Posts
नारी तुम अपनी पहचान करो ।
नारी तुम अपनी पहचान करो । उठकर अपना सम्मान करो । अबला नहीं तुम तो सबला हो शक्ति हो तुम ये तो ध्यान करो। नारी... Read more
***भारत देश के वासी हो तुम**इस मिट्टी पर अभिमान करो**
*भारत माँ के लाल हो तुम इस माता का सम्मान करो तीन रंग का मान करो अपमान ना इसका आज करो *जिस जन्म भूमि पर... Read more
भारत माँ की शान हो तुम... ...बेटियां.....
बेटी आँगन का फूल हो तुम... जीवन स्वर में संगीत हो तुम... मेरी आँखों में ज्योति हो तुम... साँसों में प्राण मेरे हो तुम... तुम... Read more
??◆कमसिन उम्र है◆??
कमसिन उम्र है इतना मुस्क़राया न करो। जुल्फ़ें छत पर जाकर सुलझाया न करो।। पड़ोसियों की नज़रें अच्छी नहीं समझो। इतना विश्वास किसी पर जताया... Read more