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* गुस्ताख़ ये दर्द *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

मुक्तक

January 4, 2017

गुस्ताख़ ये दर्द अब हमें जीने नहीं देगा
पी-पी के हारे ज़ाम अब पीने नहीं देगा
रात की तन्हाई हो या दिन का सूनापन
पी-पी पी की याद हमे जीने नही देगा ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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