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गर्मी

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

कविता

July 2, 2017

चारो ओर सिर्फ बदसूरती छाई
आग के गोले सी तपन लाई
धूल ,धूप,धुंआ धुंआ सा है
धरती गर्मी में जलती चिंगारी है

हर जगह सिर्फ बेरंगत है
आपने ही रंग से खिन्नता है
कही काली तो कही लाल
पर फिर भी सबमे कुरूपता है

साये साये चलती लू का प्रहार है
दिनकर का बड़ा क्रुद्ध मिजाज है
पशु पक्षी मानव सब बेहाल है
गर्मी का भू पर अतिचाल है

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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