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गदहे

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

कविता

March 2, 2017

गदहे,
अब मुख़्यधारा में आ रहे हैं.
वे रेंकने के बजाय,
फेंकने लगे हैँ.
गदहों का भोलापन,
उनके लदे होने का यथार्थ,
अब राजनीति का
नया अध्याय होगा,
सावधान!
गदहे,
अब मुख्यधारा में आ रहे हैं.
अब उनके सपनों को
पंख लगने लगे हैँ
और
वे लोकतंत्र के मंदिर में
अपनी बौद्धिक प्रवेश की भांति,
सशरीर पहुँचने
को आतुर हो रहे हैँ,
गदहे,
अब मुख्यधारा में आ रहे हैं.

Author
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी... Read more
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