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खड़ा हूँ राह में इक प्यार की नज़र के लिए

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

November 25, 2016

खड़ा हूँ राह में इक प्यार की नज़र के लिए
लगाने दिल पे तेरे प्यार की मुहर के लिए

अगर कहे तू मिलेगा मुझे जनाजे में
निकल पड़ूँगा तभी आखिरी सफर के लिए

तुझे भुलाने को खत तो सभी जला डाले
सहारा राख का अब भी रहा बसर के लिए

मज़ाक बेबसी का यूँ उड़ाया है मेरा
वो लौट आया मगर देखने असर के लिए

हुआ है’अर्चना’ जो अस्त प्यार का सूरज
न इंतज़ार मुझे अब किसी सहर के लिए
डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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