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खुशी

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

April 28, 2017

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खुशी आत्मा की उपज है।
सबको मिलती नहीं सहज है।
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कोई एक गुलाब से भी खुश हो जाता है।
कोई मँहगा तोफा पाकर भी आँसू बहाता है।
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खुशी मन का एक भाव है।
खुशी सकारात्मक प्रभाव है।
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कोई लाखो कमा कर रोता है।
तो कोई भूखे पेट भी हँसता है।
?
खुशी मन की भावना का उदगार है।
खुश रहना हर व्यक्ति का अधिकार है।
?
खुशी प्रसन्नता की एक झलक है।
खुशी की हर व्यक्ति को ललक है।
?
खुश रहने का एक राज है।
खुशी बाँटना मेरा अंदाज है।
?
जहाँ खुशी रहती वहाँ आशा है।
जहाँ खुशी नहीं वहाँ निराशा है।
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खुशी मन की एक भाषा है।
खुशी की नहीं कोई परिभाषा है।
?
सब खुश रहे
बस इतनी सी अभिलाषा है।
????—लक्ष्मी सिंह ??

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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