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* क्षणिका *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 6, 2017

समझ नहीं आता
जिंदगी इतनी जिद
क्यूँ करती है
जीने के तमाम
रास्ते रोककर
जीने की कसम
देती है ।।
*****
आदमी
लिखता है
और
लिखकर
उसे
बेचना
चाहता है
क्या
वास्तव में
वह
उसकी
सही
कीमत
पाता है ।।
?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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