.
Skip to content

कैसें दिखे स्वराज,हृदय है जब बिन भाव

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

March 24, 2017

भाव बिना गणतंत्र दिन, घटना बना सुजान|
गुण गायन कर बीर का, भूले दे सम्मान||
भूले दे सम्मान, चल गई भ्रम की आँधी|
फूल-माल गह टँगे, पुनः खूँटीं पर गांधी||
कह “नायक” कविराय, चली पुनि जग की नाव|
कैसें दिखे स्वराज, हृदय है जब बिन भाव||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
Recommended Posts
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 मदयुक्त भ्रमर के गुंजन सी, करती हो भ्रमण मेरे उर पर। स्नेह भरी लतिका लगती , पड़ जाती दृष्टि जभी तुम पर।। अवयव की... Read more
मुक्तक
होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी... Read more
निकलता है
सुन, हृदय हुआ जाता है मृत्यु शैय्या, नित स्वप्न का दम निकलता है। रोज़ ही मरते जाते हैं मेरे एहसास, अश्क बनकर के ग़म निकलता... Read more
अभी पूरा आसमान बाकी है...
अभी पूरा आसमान बाकी है असफलताओ से डरो नही निराश मन को करो नही बस करते जाओ मेहनत क्योकि तेरी पहचान बाकी है हौसले की... Read more