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किस्सा / सांग – # कृष्ण जन्म # अनुक्रमांक – 13 – बहरे तबील # टेक – सुणी आकाशवाणी, मेरी मौत बखाणी, ये सुणकै कहाणी, मेरा टूट गया दम, हे देवकी डरूं, तुझे मार मरूं, पाछै बात करूं, तनै पहले खतम। ।टेक।

लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |

कविता

August 14, 2017

किस्सा / सांग – # कृष्ण जन्म # अनुक्रमांक – 13 – बहरे तबील #

वार्ता:-
सज्जनों | कंस जब आकाशवाणी की बात सुनता है की तेरे को मारने वाला तेरी बहन देवकी के गर्भ से ही जन्म लेगा तो फिर कंस सोचता है कि मै क्यों न देवकी को ही मार दूँ – न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी | इसलिए वह अपनी बहन देवकी को मारने लगता है लेकिन फिर देवकी अपने भाई कंस से पुकार करती है लेकिन फिर देवकी की पूकार को नकारते हुए कंस कहता है कि आकाशवाणी की बात सुनके मेरे को भय सताने लगा है और मेरा अन्दर ही अन्दर दम घुटने लगा है | अब कंस मौत के भय से डरते हुए देवकी को क्या कहता है |

सुणी आकाशवाणी, मेरी मौत बखाणी, ये सुणकै कहाणी, मेरा टूट गया दम,
हे देवकी डरूं, तुझे मार मरूं, पाछै बात करूं, तनै पहले खतम। ।टेक।

तुझे दूंगा जता, तेरी ये है खता, मुझे चलग्या पता, दुश्मन लेगा जन्म,
ना तै बहाण नै भाई, कोए मारैगा नाही, तेरी शादी रचाई, ये किया है जुल्म।।

मेरा कांपै हिया, जागा मुश्किल जिया, सुणकै भभक लिया, न्यूं होग्या भस्म,
मै डरता नहीं, जिंदा फिरता नहीं, कदे भरता नहीे, ऐसा होग्या जख्म।।

तेरे केश पकड़कै, बोल्या कंस अकड़कै, काटू शीश जकड़कै, निकालूंगा दम,
जब आवै सबर, पटज्या सबको खबर, तूझे मारूं जबर, आज बणकै नै जम।।

ये सवाल मेरा, दीखै काल मेरा, जन्मै लाल तेरा, ही मेरा सितम,
राजेराम नै कही, सबके मन की लही, वो रखता बही, है सबकी लिखतम।।

Author
लोककवि व लोकगायक पं. राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य @ संकलनकर्ता - सन्दीप कौशिक, लोहारी जाटू, भिवानी - हरियाणा |
संकलनकर्ता :- संदीप शर्मा ( जाटू लोहारी, बवानी खेड़ा, भिवानी-हरियाणा ) सम्पर्क न.:- +91-8818000892 / 7096100892 रचनाकार - लोककवि व लोकगायक पंडित राजेराम भारद्वाज संगीताचार्य जो सूर्यकवि श्री पंडित लख्मीचंद जी प्रणाली से शिष्य पंडित मांगेराम जी के शिष्य जो... Read more
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