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“कारगिल”

RAJESH BANCHHOR

RAJESH BANCHHOR

कविता

January 29, 2017

ललकार हमें न ए जालिम
अब हमें नहीं सहना है !
खबरदार ए सरहदपार
कश्मीर हमारा अपना है !!
मत दोहरा इतिहास भूल से
इतिहास नया बनाके देख !
यारी को उत्सुक ये धरती
हाथ जरा बढ़ा के देख !!
अमन-चैन का सबक सीख ले
वरना तू पछताएगा !
कसम हमें है इस मिट्टी की
तू मिट्टी में मिल जाएगा !!
कारगिल के जर्रे-जर्रे से
यही आवाजें आती है !
दुश्मन देश संभल जा वरना
एक निशाना काफी है !!

Author
RAJESH BANCHHOR
"कुछ नया और बेहतर लिखने की चाह......" राजेश बन्छोर "राज" जन्मतिथि - 05 जून 1972 शिक्षा - सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा सम्पर्क - वार्ड-2, पुरानी बस्ती हथखोज (भिलाई),पोस्ट - सुरडूंग, जिला - दुर्ग, छत्तीसगढ़ 490024 मो. नं. - 7389577615 प्रकाशन... Read more
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