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** कब तलक **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गज़ल/गीतिका

March 20, 2017

? ****२४.५.२०१६*****?
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स्वारथ के वशीभूत होकर आज मानव
मौत का ताण्डव सहेगा कब तलक
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मानव मानव से झगड़ेगा कब तलक
मौत का ताण्डव रचेगा कब तलक
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मन बिलबिला कर रो उठा है तेरी खातिर
आ भी जा अब दूर रहोगे कब तलक
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मावस अंधेरी घेर लेती है निशा को
कौन जाने जिंदगी है कब तलक
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रोकती है मुझको उसकी सदाए आज भी
सुनी ना, तो फिर मिलेंगे कब तलक
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प्यार का घरौंदा है कच्ची मिट्टी का घड़ा
जमाने की ठोकरों से बचायेगा कब तलक
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मैं तुम्हारी साजिसों को जानता हूं
मुझसे छुपाओगे कब तलक
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रात को सूरज ना निकलेगा मगर
चांद उजियारा फैलायेगा कब तलक
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देश का शासन तुम्हारे हाथ है आखिर
गरीबों को रुलाओगे कब तलक
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रोक लो आंखो के आंसू आर्तजन के
अंतर्मन से आखिर बहेंगे कब तलक
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सांवली सूरत भ गयी आज मेरे मन को
रोक पाओगे आखिर कब तलक
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देखता है क्यों आंखे फाड़कर फलक पर
चांद उरत आएगा जमीं पर कब तलक
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चित्र-विचित्र सी सारियों में नारियां है
महफ़िल में पहचानोगे कब तलक
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ऐ खुदा तेरी खुदाई को देखता हूं मगर
आयेगा आसमां से उतर कर कब तलक
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मजबूर कर दे प्यार तो
प्यार चलेगा कब तलक
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मुफ़लिसी फकापरस्ती छोड़कर
गैर के साये में खायेगा कब तलक
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देख ले तक़दीर तेरी सांवली है सोच ले
गैरों के घर दीपक जलाएगा कब तलक
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मत जा मायाजाल में फंसकर भंवर में
डूबती नैया बचाकर लाएगा कब तलक
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जान जोखिम में डालकर कौन
किसको बचायेगा कब तलक
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कब तलक दिल में महसूस किया करें
अब दूरियां प्यार में सहेगा कब तलक
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भटकती आत्माऐं आती है अक्सर रात में
तसव्वुर में डराएंगी आखिर कब तलक
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?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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