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कदम लडखडाये तो भी आगे चलना होता है

Bhupendra Rawat

Bhupendra Rawat

गज़ल/गीतिका

August 4, 2017

क़दम लडखडाये तो सम्भलना होता है
मंज़िल हो दूर फिर भी आगे चलना होता है

हर कदम पर गिराने वाले मिल ही जाते है
उनको पछाड़ मंज़िल की और बढ़ना होता है

कामयाबी नही मिलती हर कदम पर
कभी कभी असफलताओं को भी चखना होता है

डर जाते है अक्सर असफलताओं से
अपने अंदर विश्वास भरना होता है

हर एक कदम लक्ष्य की और ले जाता है
हर एक कदम पर सम्भल के चलना होता है

एक मकड़ी भी नही पाती मंज़िल बिना गिरे
गिर कर उठना और फिर सम्भलना होता है

हार के डर से प्रयास ही ना करो
ऐसे में तो मरना ही अच्छा होता है

कोशिश करने से ही तो मिट्टी सोना होता है
सफलता पाने के लिए कर्म का बीज़ बोना होता है

सफ़लता पाने के लिए नींदों को भी खोना होता है
बन्द आँखों से किसका सपना पूरा होता है

लड़खड़ाते कदमों को सम्भलना होता है
मंज़िल हो दूर तब भी राह में चलना होता है

भूपेंद्र रावत
4।08।2017

Author
Bhupendra Rawat
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।
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