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ऐ जिन्दगी

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

February 28, 2017

(1)????
ऐ जिन्दगी किससे शिकायत करूँ
सोना भी छुआ तो कोयला बन गया।
रफ्ता -रफ्ता मेरे सभी अरमान जल गए
जख्मी हृदय पर अनगिनत फफोला बन गया।
????

(2)????
ऐ जिन्दगी
आ तुझे हँसना सिखा दूँ।
जख्मी दिलों पर
आ मैं थोड़ा मलहम लगा दूँ।
????—लक्ष्मी सिंह??

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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