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इश्क़ कर सब भटक रहें,

शुभम् वैष्णव

शुभम् वैष्णव

कुण्डलिया

July 11, 2016

इश्क़ कर सब भटक रहें , अपनी अपनी राह।
काम कुछ तो अब कर लो, क्या देगी कुछ चाह।
क्या देगी कुछ चाह , खूब सब मेहनत करो।
चाहत में अब डूब , भूखें यूँ अब ना मरो।
स्वाभिमान बन आज , काम में लगन लगा कर।
हो जाए बर्बाद , ना अब ऐसे इश्क़ कर।

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