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आसमान के काले बदरा

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

February 14, 2017

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आसमान के काले बदरा
आज इतना जोर से क्यों बरसा ?
क्या ?
तेरा दिल भी
किसी के दर्द में तड़पा ,
जो इतना जोर से बरसा ।

क्या किसी प्रेमी को
अपना प्यार याद आया ,
या किसी विरहन की आँखें
प्रीत को तरसा ।
जो इतना जोर से बरसा ।
क्या ?
तेरा दिल भी
किसी के दर्द में तड़पा,
जो इतना जोर से बरसा ।

क्या किसी पिता को
अपनी बेटी की याद आई ,
या किसी माँ की ममता
रात भर रोई ।
जो इतना जोर से बरसा ।
क्या ?
तेरा दिल भी
किसी के दर्द में तड़पा।
जो इतना जोर से बरसा ।

क्या किसी किसान के घर
ना जल सका चूल्हा ,
या किसी गरीब का बच्चा
भूख से रोया ।
जो इतना जोर से बरसा ।
क्या ?
तेरा दिल भी
किसी के दर्द में तड़पा।
जो इतना जोर से बरसा ।

क्या आतंक और दुराचारी का
बोझ बढ गया ज्यादा।
ये देख धरती काँप कर रोई ।
जो इतना जोर से बरसा ।
क्या ?
तेरा दिल भी
किसी के दर्द में तड़पा।
जो इतना जोर से बरसा ।

आसमान के काले बदरा,
आज इतनी जोर से क्यों बरसा ?
क्या ?
तेरा दिल भी
किसी के दर्द में तड़पा।
जो इतनी जोर से बरसा।
?लक्ष्मी सिंह?

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
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