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“आँखों आँखों में बात होने दो”

Ananya Shree

Ananya Shree

कविता

January 29, 2017

आँखों ने कहा कुछ आँखों से
आँखों आँखों में बात हुई
यूँ बोल उठी सुन साजना
अब तो ये आँखें चार हुई
आँखों में बसते बसते तुम
अब प्रीत गले का हार हुई
क्यों हाथ पकड़ते हो मेरा
अँखियों में शरम की धार हुई
पलकें झपक के बोल उठी
ये ऑंखें जीवन सार हुई
चंचल चितवन कजरारे नयन
ये ऑंखें तुमपे निसार हुई
है प्रेम विहल अँखियाँ मेरी
तेरी छवि इनका श्रृंगार हुई
आँखों ने कहा कुछ आँखों से
आँखों आँखों में बात हुई

अनन्या “श्री”

Author
Ananya Shree
प्रधान सम्पादिका "नारी तू कल्याणी हिंदी राष्ट्रीय मासिक पत्रिका"
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