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अविस्मरणीय क्रिकेट की वो रात

drpraveen srivastava

drpraveen srivastava

लेख

September 30, 2017

अविस्मरणीय क्रिकेट की वो रातः

सांय की हल्की -हल्की माटी की सोंधी खुसबू एवं षीतल पवन के मन्द-मन्द झोके मन को अंत्यन्त खुष कर रहे थे। मैंे मन में स्न 1983 में क्रिकेट के ताने बाने बुन रहा था । कभी क्रिकेट जगत में 50-50 ओवरांे के मैच मे फिसड्डी माने जाने वाली भारतीय क्रिकेट टीम में कपिल देव, ने जैसे स्फूर्ति एवं होैसलो के पंख लगा दिये थे। कप्तान कपिल देव, के सब दीवाने हो गये थे । एक युवा टीम मे हुनर का निखार आ गया था । क्रिकेट टीम अपनी हर कसैाटी पर खरा उतर रही थी । सेमीफाइनल में इंग्लैंड को परास्त करने के पष्चात भारत आत्मविष्वास से भरी हुयी टीम थी । फाइनल में उसके सामने दो बार की विष्व चैम्पीयन टीम वेस्टइंडीज थी जो जीत की हेट्रिक करने के लिय बेताब थी । महारथियों से भरी इस टीम के कप्तान क्लाइब लाएड, थे, बेमिसाल विवियन रिचर्ड उप कप्तान थे। रात्रि के 8 बज चुके थे दोनो टीमे आमने सामने थी पहले भारतीय टीम ने बल्ले बाजी की थी। ज्योल गार्नर , एन्डी रावर्टस , मेल्कम मार्षल, जैसे तूफानी गेंदबाजो के समक्ष भारतीय टीम अधिक देर तक टिक नही सकी । पुछल्ले बल्ले बाजो जैसे मदन लाल आदि ने जैसे तैसे स्कोर में वुद्धि की और कुल 184 रन पर पूरी टीम आउट हो गयी।
रात्रि के इस घने अधंकार मे मैं और मेरंा रेडियो दोनो घबरा रहे थे मेने अपने बडे से दो मजिले मकान की खिड़कियां बन्द कर दी थी । मन निराषा से भर गया था दिन की थकान हाबी हो गयी थी। अन्ततः मेने उम्मीद छोड़ दी थी। मुझे सांत्वना देने के लिये भी कोई नही था । विषाल वेस्टइंडीज टीम के सामने यह स्कोर कुछ खास नही था। अतः कब निद्रा की गोद में मैे सो गया पता ही नही चला ।
सुबह के प्रकाष मे मेंै निराषा हताषा ओढे उठा । मेरे लिये यह फैसला अन्तिम था कि वेस्टइंडीज ने जीत हासिल कर ली होगी । रविवार की उमस भरी सुबह थी उसमें सफलता का प्रकाष नव प्रभात का अगाज कर रहा था। क्रिकेट के नवयुग का आरम्भ हो रहा था। परन्तु में इन सब से अन्जान खीझ उतारते हुये हाॅस्टल पहुॅचा ताकि ये निष्चित कर सकूं कि भारत कितने रन से हारा, मैेने जिज्ञासा से अपनी आखें अपने मित्र पर टिका दी और उसकी खीझ व हतासा देखने के लिये उत्सुकता वष पूॅछा मित्र कल रात्रि मे भारत के भाग्य में क्या लिखा था। हार या …………………….जीत। मित्र के जवाब ने मुझे अवाक कर दिया। मेैं स्तब्ध हो गया था भारत 40 बहुमूल्य रनो से वेस्टइंडीज को पराजित कर चुका था एक नया इतिहास लिखा जा चुका था। परन्तु मेैं उसका साक्षी नही बन सका था । जब दुनिया भारत की जीत पर जष्न मना चुकी थी कमंेन्ट्रेटर का सिंहनाद मेरे कानो में गूुजने लगा मेंै केवल कल्पना ही कर सकता था उस महान विजय उन्माद उत्साह की जो कप्तान कपिल देव ने अपने प्रिय देष को दिया था। मैें अपने ही नजरो में पष्चाताप करने लगा था क्योकि मेने उम्मीद छोड़कर भारतीय रण बांकुरो के अदभुत कौषल को नही देखा था ।
इसी वक्त मुझे अहसास हुआ कि कभी उम्मीद का दामन नही छोडना चाहिये चाहे चुनौती कितनी भी बड़ी और कठिन क्यों न हो ।
क्रिकेट अनिष्चिताओ का खेल है इसमें कभी भी कुछ भी हो सकता है । भारतीय क्रिकेट के इस अदभ्ुात उलट फेर ने भारतीय क्रिकेट की दषा एवं दिषा दोनो बदल दी भारतीय क्रिकेट बोर्ड सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड बन गया और भारतीय खिलाड़ी सुपर स्टार बन गये। मुझे इस बात का गम जरूर है कि भारत वर्ष के निर्णायक छडों का गवाह भले ही मेैं न बन सका परन्तु उसके अच्छे दिनो में मैेने उसका हमेषा साथ दिया आज भारतीय क्रिकेट बुलन्दियों पर है उसका सारा श्रेय श्री कपिल देव जैसे महान प्रेरणादायी काल जयी कप्तान को जाता है। हम ईष्वर से प्रार्थना करते है कि श्री कपिल देव निखंज जी दीर्घायु हो एवं भारतीय क्रिकेट के एवरेस्ट छूने के अभियान मे साक्षी हो, भागीदार हो।
सारा हाॅस्टल रात्रि में जषन मनाने के बाद सेा रहा था उन्हे छेड़ने की हिम्मत मुझ में नही थी। मेरा दिल बल्लियांे उछल रहा था उस प्रातः जब मैं मीठी जलेबियों का रसा स्वादन कर रहा था मेरी पलके भीगी हुयी थी दुनिया के इस नायाब तौफे से वुिंचत हेा गया था मैें । इस उम्मीद के साथ मैेने गहरी सांस ली कि फिर कभी । यह अन्त नही षुरूआत है भारतीय क्रिकेट के उज्जवल भविष्य एवं युवा क्रिकेटरों के उम्मीद की ।

डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव

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